गुमनाम बचपन

वो हर रोज़ सुबह से पहले जाग जाता है, रात में ठंड से काँपता हुआ, सारी रात सितारो को निहारता है। फुटपाथ की बिस्तर पर, असामान के ख़्वाब पालता है। वो भी बचपन है शायद, या बचपन की भीख मांगता है। आपने भी शायद देखा होगा उसे, आपकी गाड़ियों के पीछे भागता हुआ, दो रुपये […]

बचपन

आज सुबह जब मैं उठा, तो कुछ आवाज़े आ रही थी बाहर से, जैसे कोई रो रहा था। बाहर जाकर देखा तो पता चला, मेरा बचपन कबाड़ी में नीलाम हो रहा था। वो खिलौने वाली गाड़ी जो मिली थी पहले जन्मदिन पर, वो किताबें जिन्होंने जीना सिखाया था। वो चाभी भरने पर नाचने वाला भालू, […]

फिल्में

अजीब सा खेल है इन फिल्मों का, चन्द घंटो में ही कई ख़्वाब दिखा देती है। किरदारों में दिखने लगते है अपने चेहरे, कहानियों में अपनी ज़िन्दगी दिखा देती है। आंसू छलक जाते है कभी, कभी लबो पर वो मुस्कान लाती। कभी यादों के उन स्याह पन्नो से, उस अधूरे इश्क का दीदार करा देती […]

सफ़र

सफ़र काफी लंबा था शायद, जो मंज़िल के ज़िक्र से ही रास्ते थम गए। अभी तो बस दो कदम ही चले थे, ये जूते न जाने क्यों घिस गए। सूरज भी मानो उफान पे था आज, हम छांव ढूंढते रहे। फिसल गए कई बार, कई बार तो मुंह के बल गिरे। पर ये दिल तो […]

आवाज़ 

शायद तुम भी सुन पाते, वो अलफ़ाज़ जो दब गए उस डायरी में, उन मोटी मोती किताबो के नीचे। तुम भी करते गुफ्तगु मेरे ख़्वाबो से, अगर ज़रूरतों के परे सोच उड़ान भरती तुम्हारी, शायद तुम भी सुन पाते। खुल कर मुस्कुराते भी, शायद एक दो तराने तुम भी गुनगुनाते। अगर कोशिश करते शिद्दत से, […]

First Masterpiece

You were five, When you made your first masterpiece, With two mountains and a river flowing, Beside a small house, You painted your fantasy. You picked up your crayons, And covered it up in blues and greens. You wanted a swing, For your childhood to rest on. So you picked up the brown, And sketched […]

तू कोई और है।

रास्तों की रंजिशों में, तू मंज़िल से समझौता न कर। ख़्वाबो की उड़ान भरने की, तू एक नाकाम कोशिश ही कर। न कैद कर अपनी आँखों को, देखने को पूरा जहां बाकी है। उतार दे हर नक़ाब, ज़रा खुद से दो बातें तो कर। तू कोई और है, जान कर भी अनजान है। कुछ अलग […]