ऐशट्रे और सपने

एक छोटा सा कमरा दिखा था सपने में कल, बिखरा पड़ा सामान,छोटा सा बिस्तर, एक मेज़ और एक पुरानी चीं ची करने वाली कुर्सी। एक बड़ी सी खिड़की थी बिल्कुल मेज़ के सामने और कोई दरवाजा नहीं। मेज़ पर धूल की मोटी परत थी और उस धूल में लिपटी हुई कुछ किताबें। बगल में एक […]

तू

तू ही दरिया, तू ही सूरज, तू ही आस्था, तू ही मूरत। तू ही नांव, तू ही समंदर, तू ही पोरस, तू ही सिकंदर। तू ही शायरी, तू ही शायर, तू ही ख़्वाब, तू ही कायर। तू ही सोच, तू ही फैसला, तू ही आशा, तू ही हौसला।

काश!

लौट ही आए न वापस, पता था मुझे, तुम वापस ज़रूर आओगे एक दिन, तुम कायर थे, और कायर ही रहोगे। घुस जाओ फिर से नंबरों की दौड़ में, कहीं पीछे न रह जाओ सबसे इस बार, काफी पीछे। लेकिन उससे पहले आओ दो बातें करें, तुम फिर से अपनी खामोशी का रोना रो लो। […]

फुर्सत 

क्या चक्कर है बॉस, दबे पांव गिरते-उठते , बीच बाज़ार में बिन जूतों के, कहां भागे जा रहे हो। वो जो ख़्वाबो की रानी, हाथों में गुलाब, आँखों में चेनाब लिए, तेरे सामने खड़ी है। किसने देखा है, आखिर किसको पड़ी है। वक़्त कम है अपने पास,आखिर फुर्सत किसको है। एक ज़िन्दगी है जीने को […]

ऐसा कहते हैं कि

कहते हैं कि पहाड़ों के आगे, समंदर किनारे, एक कहानियों का शहर बसता है कोई। जहाँ सभी लोग खुश हैं, हँसते खेलते रहते हैं हर वक़्त। वहाँ का राजा भी नाचता है हलवाई की दूकान पर, और ढेर सारी जलेबियां खा जाता है। जलपरियाँ घूमती है बाज़ार में हो बेफिकरा, वो क्या है मोन्टी भेड़िया […]

Your Childhood

Knock knock! Who’s there? “Your childhood” My childhood who? The little kid playing hide and seek, Hiding behind the curtains, With toes poking out in serendipity. Fighting for the last bite of the cake, With the chocolate syrup all over my face. With a glass of orange juice in one hand, And pockets full of […]

तमाशा

आज होने दो तमाशा मेरी ज़िन्दगी का, मैंने भी कुर्सी पर बैठ, तालियां बहुत बजायी है। थोड़ा तुम भी हस लो, मेरी मजबूरी पर। मेरे आँसुओं को देख, खुल कर ठहाके भी लगाना। थोड़ा खेल लेना बचपन में मेरे, थोड़ा जवानी में दौड़ भी लगाना। थोड़ा घूम लेना दुनिया भी, फिर बुढ़ापे में बच्चो को […]